
जब डोनाल्ड ट्रंप रूस के राष्ट्रपति पुतिन और फिर यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की से गले मिल रहे थे, तब कहीं दूर भारत में एक्सेल शीट्स में बैठे अधिकारी टैरिफ की EMI गिन रहे थे।
27 अगस्त से अमेरिका भारत पर 50% तक का टैरिफ लगाने वाला है, और वजह वही पुरानी:
“भारत, रूस से सस्ता तेल क्यों खरीद रहा है?”
भारत को राहत ?
ट्रंप ने पुतिन से कहा कि शांति ज़रूरी है, और ज़ेलेंस्की से कहा कि “हथियार मांग लो, लेकिन बातचीत करो!”
व्हाइट हाउस में डिनर, डायलॉग और ड्रोन अटैक — सबके बीच भारत उम्मीद कर रहा है कि कहीं से कोई डिप्लोमैटिक चमत्कार हो जाए और ये टैरिफ “Postponed Until Further Notice” में बदल जाए।
सीनेटर ग्राहम की धमकी: “सस्ता तेल लिया? तो युद्ध झेलो!”
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने खुली धमकी दी है:
“पुतिन को समझाओ! वरना हम उन देशों पर चढ़ाई करेंगे जो रूस से सस्ता तेल ले रहे हैं!”
भारत ने इस पर कोई बयान नहीं दिया, लेकिन पेट्रोल पंप वाले ज़रूर बोले — “चलो, अब तो 150 रुपये लीटर भी जायज़ लगेगा।”

क्या टैरिफ टल सकता है?
ट्रंप की मानें तो पुतिन और ज़ेलेंस्की से उनकी बातचीत “सुपर सक्सेसफुल” रही है। अब इस सुपर सक्सेस के बदले में भारत को सुपर टैरिफ से बचाव मिलेगा या नहीं, ये 27 अगस्त से पहले पता चलेगा।
फिलहाल व्हाइट हाउस से संकेत हैं कि अगर शांति की दिशा में बात बढ़ती है, तो टैरिफ पर पुनर्विचार हो सकता है। और अगर नहीं हुआ तो…
“भारत को झेलना होगा 25-50% तक का एक्स्ट्रा टैक्स, सिर्फ इसलिए कि वो डिस्काउंटेड तेल का दीवाना है।”
शांति समझौता तो ज़रूरी है ही, लेकिन उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है – अमेरिका की अनुमति से शांति समझौता।
वरना भारत को मिलेगा:
“सस्ता तेल + महंगी सज़ा = अमेरिकी टैरिफ फ़ॉर्मूला!”
ट्रंप बोले, शांति होगी! ज़ेलेंस्की बोले, पहले हथियार दो
